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जिंदगी के पड़ाव हमे हर माहौल में जीना सीखा देते है...!!!

 जिंदगी के पड़ाव ,कुछ बड़े कुछ छोटे पर हर पड़ाव कुछ ना कुछ सीखा जाता है या हमे मजबूत बना जाता है।
यह कहानी भी हर लड़की की जिंदगी से जुडी हुए है। तो चलिए शुरू करते है। 

देहरादून की अंजलि का आज २५ वर्षीय की हो गयी थी हर लड़की की तरह उसके भी सपने थे की वो नौकरी करेगी अपने पैरो पर खड़ी हो आत्मनिर्भय बनेगी। 

पर जिस तरह लड़की के अपने सपने होते है उसी तरह लड़की के माँ बाप के भी सपने होते है की लड़की का घर बस जाये। लड़की जैसे ही बड़ी होती है माँ बाप उसके हाथ पिले करने की सोचने लगते है। 

अंजलि वैसे हर काम में अच्छी थी चाहे वो पढ़ाई हो या घर का काम , व्यवहार में भी उसका को तोड़ नहीं था पर बस उसके कुछ सपने थे जो वो पूरा करना चाहती थी। 

अंजलि और अंजलि की माँ चाय पी रहे थे तभी फ़ोन की घंटी बजी दूसरी तरफ अंजलि की बुआ थी हालचाल पूछने के बाद बुआ ने अपने जानने वालो में एक लड़के के बारे में बताया, विवेक लड़का सरकारी नौकरी में है आदत का भी सही है और सबसे अच्छी बात की वो विवेक  हमारे जानने वालो में से ही है

यह सुनकर अंजलि की माँ खुश हो गयी और बात आगे बढ़ाने को बोलने लगी |

बात आगे बढ़ गयी और अब लड़के वाले लड़की से मिलना चाहते थे तो फिर मिलने की बात हुए |


अंजलि के घर वालो ने अंजलि से इस बारे में बात की पहले तो अंजलि ने बोला की उसे अभी शादी नहीं करनी पर घर वाले नहीं माने | हर कर अंजलि को ही मिलने के लिए हाँ कहना पड़ा |

अंजलि और विवेक का मिलने का समय भी आगया और दोनों ने एक दूसरे को पसंद कर शादी के लिए हामी भी भर दी |

यहाँ से शुरू होता है जिंदगी का एक अंजान सा नया पड़ाव जब एक लड़की, पत्नी का रूप लेती है |

जो मासूम सी लड़की अपने माँ बाप के वह सिर्फ चहकती ही थी उस लड़की को शादी के बाद खुद के साथ साथ अपने साथी और उससे जुड़े लोगो का भी ध्यान रखना पड़ जाता है |

कैसे अचानक से यह पड़ाव उसके जीने के तरीके को ही बदल देती है ,कैसे वो पुरे परिवार को संभाल लेती है कैसे वो इतना जिम्मेदार बन जाती है |

जिंदगी में आने वाले अलग अलग पड़ाव ही हमे हर माहौल में जीना सीखा देते है |

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