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मेरा रेड गाउन..!!

चारो तरफ चैंका चोद रौशनी और लोगो की भीड़ जमा थी , हर कोई हमारे साथ सेल्फी लेना चाहता था।   मीडिया वाले भी लाइन से खड़े थे,यह सब देख कर सुमित की सात साल पहले की बात याद आगयी। सुमित ने मुझसे कहा था की बस कुछ साल की मेहनत है और मेरा पूरा सपोर्ट चाहिए क्यूंकि शायद यह साल मैं तुम्हे वक़्त कम दू या कभी कभी मैं इतना बिजी रहू की बहुत सी चीज़े भूल जाऊ , बस तुम्हारे साथ की जरुरत है।  मैंने भी एकदम से बोला मेरा साथ हमेशा तुम्हारे साथ रहेगा और वक़्त न दे पाओ तब भी मैं तुम्हारे साथ ही खड़ी होंगी जैसे मैं शादी से पहले थी।  जब हमारी शादी नहीं हुए थी तब मेरे सब दोस्त जिनका अफेयर था रोज़ अपने साथी के साथ बहार घूमते थे , तब मैं सुमित से बहुत गुस्सा होती थी की तुम मुझे टाइम नहीं देते , मेरे साथ टाइम नहीं बिताते।  और सुमित बस यही बोलते थे की मुझे कुछ साल दो फिर जिंदगी भर साथ में आराम से घूमेंगे।  सुमित बोलते थे की मैं कुछ बनना चाहता हूँ जिससे मैं घर वालो और तुम्हारे सारे इच्छाएं पूरी कर सकू। उस टाइम भी मैंने सुमित की बात में सहमति दी थी और पूर...

मेरी अतरंगी यात्रा..!!

मेरी पहली  अंतर्राष्ट्रीय हवाई यात्रा आज भी यादगार है हलाकि वो मुझे याद ही नहीं , पूछो ऐसा कैसे हो सकता है की मुझे अपनी हवाई यात्रा याद ना हो ?  तो सुनिए बात है करीब ८ साल पहले की , शादी के ठीक ६ दिन बाद हमे (मेरे पति सुमित और मुझे ) एक दूसरे देश के लिए निकलना था।  पति देव की अमेरिका में नौकरी लगी थी , अपने देश से इतने दूर जाना ही दिल में थोड़ा हलचल मचा रही थी।  कैसे कर पाऊँगी मैं वहा अपने देश जैसा होगा क्या वो देश भी, हर वक़्त मैं यही सोचती थी।  आखिर वो दिन आ गया सुबह से ही सब घर वाले हमारे विदाई के काम में लगे हुए थे।  हमारे घर से हवाई अड्डा करीब २०० किलोमीटर लगभग ७ से ८ घंटे का रास्ता, तो घर के हर सदस्य हमे हवाई अड्डा छोड़ने आये।  हम समय से हवाई अड्डा पहुंच गए थे फिर हमने सबसे मिलना किया थोड़े भावुक हुए और टा टा करते हुए हवाई अड्डे की ओर चल दिए।  अंदर जाकर बोर्डिंग पास लिए और अपने ज़हाज़ की तरफ चल दिए।  हमारा बिज़नेस क्लास का टिकट बुक हुआ था तो हम उत्साहित भी थे और मेरी तो यह पहेली  अंतर्राष्ट्रीय ...

800 मीटर की रेस..!!

बात उन दिनों की है जब मैं 9th क्लास में थी और स्कूल में स्पोर्ट्स के लिए बच्चो को अंडर १६ और १९ के लिए सेलेक्ट कर रहे थे, मैंने सोचा की क्यों न स्पोर्ट्स में भी टॉय किया जाये, ज्यादा से ज्यादा कोई रैंक नहीं ला पाऊँगी पर कोशिश करती हूँ और इसी बहाने किसी और शहर में घूमने को भी मिलेगा।  तो क्या हम चल दिए टीचर के पास मुँह उठाके, किसी से कम थोड़ी है हम भी।  टीचर को शॉट पुट में और लॉन्ग जम्प में अपना नाम लिखने को बोल दिया और फिर हम सब लोग प्रैक्टिस में लग गए।   अब तो क्लासेज भी बँक करने लगे यह बोलकर की सर प्रैक्टिस करनी है , सर लोग भी कुछ नहीं बोल सकते थे क्यूंकि हम सच में प्रैक्टिस करते थे।  एक दिन टीचर बोली की कोई भी ४०० मीटर और ८०० मीटर रेस में नहीं है , किसी को बोलो की नाम दे पर कोई रेडी ही नहीं हुआ।  टीचर को भी हर फील्ड में बच्चो के नाम देने थे तो उन्होंने हमसे कहा कोई रेडी नहीं हुआ बस एक मैं थी जिसने टीचर को बोला मेरा नाम लिख दीजिये।  घर आकर पापा मम्मी को बताया तो वो बोले ३ या ४ दिन में कैसे होगी प्रैक्टिस, रेस में लिया है उसके लिए...

मेरा पहला कंप्यूटर..!!

समय तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और समय के साथ साथ नयी नयी टेक्नोलॉजी भी आ रही है | यह कहानी तब की है जब मोबाइल फ़ोन और कंप्यूटर के बारे में सुनने को मिल रहा था,लैंडलाइन का जमाना था वो | मोबाइल होना तो एक सपने जैसा था उसी तरह तब कंप्यूटर चर्चा में था की कंप्यूटर में हम सब कुछ कर सकते है, कंप्यूटर में हम टाइपिंग ड्राइंग, इंटरनेट सर्फिंग और मूवीज या सांग्स भी सुन और देख सकते है या तो नेट पर या सी डी लगा कर | उस समय यह सुनना ही बहुत चौकाने वाली बात थी की ऐसा भी हो सकता है एक कंप्यूटर पर हम इतना कुछ कर सकते है |  हमे तो बस ऊपर ऊपर की बात ही पता थी यह तो पता ही नहीं था की कंप्यूटर इससे भी ज्यादा बहुत कुछ कर सकता है | हर तरफ से कंप्यूटर की ही बातें होती थी हमारे स्कूल में कंप्यूटर की क्लास भी स्टार्ट हो गयी थी, उस क्लास मैं हम सब बच्चे कंप्यूटर पर कलरिंग करते थे | सबको कंप्यूटर बड़ा पसंद आने लगा था और आये भी क्यों नहीं एक कंप्यूटर के इतने फायदे भी तो थे | मैंने भी कंप्यूटर लेने की बात अपने पापा के सामने रखी, उनको बोला की कंप्यूटर से मैं घर पर ही पढ़ लुंगी, टाइप...