सुनो क्यों न फिर से पंद्रह साल पहले की तरह इस बार अपनी एनिवर्सरी मनाये, उस समय के संगीत से आज की महफ़िल सजाये - मैंने पूछा पति देव ने मुस्कराते हुए बोला- अरे वाह नेकी और पूछ,हाँ हाँ पुरानी यादें भी ताज़ा हो जाएँगी। ठीक है मैं भी तैयारी करती हूँ सब कुछ की लिस्ट बना लेती हूँ और दोस्तों को भी इनविटेशन भेज देती हूँ - मैंने बोला। हाँ ठीक है मुझे भी भी बता देना की क्या क्या करना है मैं सारा सामान ले आऊंगा - पति देव ने कहा। मैं बोली ठीक है। और अपने काम में लग गयी। तभी बहार जाते हुए पति देव ने बड़े प्यार से बोले - सुनो जो साड़ी मैंने तुम्हे गिफ्ट की थी पहेली एनिवर्सरी पर वही पहनना । मैंने भी बोल दिया हाँ ठीक है। जल्दी में यह भूल ही गयी की वो साड़ी वह गिफ्ट तो पंद्रह साल पहले मिला था अब तो मैं बहुत मोटी हो गयी हूँ, और इतने टाइम से वो साड़ी पहनी ही नहीं है । सोचा एक बार क्यों न चेक कर लू (हम मोटे हो भी जाते है पर हमे लगता नहीं है ) साड़ी का क्या है वो तो सदाबहार होती है किसी को भी आजाती है असली तो ब्लाउज होता...



