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Showing posts with the label Motherhood

पर माँ हम ही क्यों ?

 हर किसी की जिंदगी में बहुत सारे छोटे बड़े पड़ाव जरूर आते है , कुछ पड़ाव हमे याद नहीं रहते और कुछ पड़ाव हमारी जिंदगी बदल देते है। ऐसी ही एक कहानी है सीमा की , कक्षा नौ में आगयी थी इस साल।  पढ़ाई में भी वो अच्छा कर रही थी हॅसमुख स्वाभाव की थी सीमा।  उसकी बातें सबका मान मोह लेती थी।  शरारते भी वो बहुत करती थी इधर से उधर फुदकते ही रहती थी , माँ उसको कितना समझाती की अब बड़ी हो गयी है थोड़ा घर का काम सीख ले या यह उछलना कूदना थोड़ा काम कर पर सीमा किसी की भी नहीं सुनती थी।  ऐसे ही सीमा के साथ वक़्त भी बढ़ रहा था यह वक़्त वो वक़्त था जब हर लड़की के जीवन में आते है , जब लड़की के शरीर के कुछ अंग में बदलाव आता है।  ऐसा बदलाव तो उस वक़्त समझना बहुत ही मुश्किल है , या सच कहे तो उस बदलाव को समझाने वाला ही कोई नहीं होता।  सीमा के शरीर में भी बदलाव आ रहे थे वो अब एक बच्ची से युवा होने जा रही थी।  पर उसको इस महत्यपूर्ण पड़ाव के बारे में नहीं पता था वो अपने ही शरीर से नफरत करने लगी थी।  सीमा को खुद का ही सीना बढ़ता हुआ दिख रहा था , ऐसा...

Happiest Moment for kids...Surprise..!!!

 

mother - daughter Duo... #kurtapajama #tonykakkar

 

मेरे घर आयी एक नन्ही कली..!!!

नौ महीने अपनी खोक में पाला, खुद के शरीर को तेरे लिए बदला। कभी सोना चाहा तो कभी रात भर जाएगी, तुझे देखा नहीं फिर भी तेरे सपने सजाने लगी। पैरों के सूजन के साथ तेरे अहसास में जीने लगी। वो कुछ खाना और फिर उलटी करके आना, अगर बैठ जाऊ तो मुश्किल है खुद को उठाना। जो बेपरवाह थी कभी आज कदमो को संभाल के चली सपने सजा लिए थे ,मेरे घर भी आयी एक नन्ही कली।

3 Generations Together !!!

छोटे से डिब्बे में दो दिल..!!

माँ के लिए उसकी हर प्रेगनेंसी बहुत ही यादगार होती है। उसी तरह मेरे लिए भी मेरी दोनों प्रेगनेंसी की यादें आज भी ताज़ा है, किस तरह मुझे अपनी पहेली प्रेगनेंसी का इंतज़ार था।  इतने साल कोशिश के बाद भी मेरी गोद नहीं भरी थी पर कहते है न भगवान के घर में देर है अंधेर नहीं।   मुझे शादी के ३ साल बाद माँ बनने का सौभाग्य मिला और फिर तो जिंदगी में खुसियो की बहार ही आगयी।  पर कहानी शरू होती है मेरी दूसरी प्रेगनेंसी की - मैंने शरू से ही सोच रखा था की बच्चे दो ही करूंगी ताकि उनको ए...

भगवान का दिया हुआ सबसे बड़े दर्जे का हिस्सा..!!!

पुरे प्रेगनेंसी के मेरे ९ महीने अच्छे से निकल गए अब आया टाइम डिलीवरी का।  डॉक्टर ने १२ अगस्त की तारीक दी थी तो १२ तारीख का बेसब्री से इंतज़ार था सब तैयारी कर ली थी।  १२ तारीक आयी और चली गयी पर कुछ नहीं हुआ १३ भी गयी और १४ तारीक आ गयी मैं शाम को अपनी सासु माँ के साथ शॉपिंग पर निकल गयी।   शॉपिंग करते हुए ही मुझे डॉक्टर का फ़ोन आया की आपकी डिलीवरी डेट १२ थी पर आज १४ हो गयी है आपको आज एडमिट होना पड़ेगा हम आज आपको पैन इन्दुस करेंगे। अचानक से यह सुन थोड़ा मैं घबरा सी गयी पर डिलीवरी तो होनी ही थी।   हम शॉपिंग से वापस घर पहुंचे, खाना वगेरा सब निपटा के मैं और सुमित हॉस्पिटल की तरफ चल दिए।  हॉस्पिटल पहुंचे सब फॉर्मलिटीज कर एडमिट हो गयी , नर्स आयी और मुझे कुछ इन्दुस के इंजेक्शन लगाके बोलने लगी की अभी आराम कर लो कल का दिन बहुत लम्बा जायेगा।   पर मुझे नींद ही नहीं आयी कुछ दर्द में ही मुझे पेट में दर्द होने लगा , डॉक्टर  को बताया तो वो बोली आपका delivery का टाइम आ गया है।   और मुझे डिलीवरी  रूम की तरफ ले गए।  ...

वो मम मम की आवाज..!!

अपने भी बेसब्री से इंतज़ार किया होगा अपने बच्चे के मुँह से "माँ" सुनने के लिए , है ना ? हर माँ इंतज़ार करती है उस अनमोल पल का की बच्चा उसको अपनी प्यारी सी आवाज मे माँ कहकर बुलाये चाहे वो मम हो, मम्मी हो या माँ हो।  कितना अद्भुत होता है वो पल भी , हम बच्चे के होते ही माँ तो बन जाते है पर उस बच्चे के मुँह से माँ सुनने के लिए हमे कुछ महीने इंतज़ार करना पढता है | किसी का इंतज़ार ज्यादा होता है किसी का कम पर हम माये उस पल के लिए इंतज़ार करती है | हम औरते होती ही है ऐसी कुछ, माँ तो हम बच्चे के कोख में आते ही बन जाते है पर उस बच्चे का ९ महीने इंतज़ार करते है | इसके बाद से ही हमारी इंतज़ार करने की एक आदत सी हो जाती है ,अपने बच्चे की पहली मुस्कान,उसके पहले दो दांत , उसका पहली बार चलना , उसका पहली बार हाथ पकड़ना और उसका वो पहली बार माँ बोलना | ऐसे ही कई बातें है जो माँ बनने के बाद हर रोज़ हम महसूस करते है ,कुछ एहसास तो हम बया कर सकते है पर कुछ एहसास तो दिल में बस गए है जिनको  जितना  भी बया करो हम समझा नहीं सकते | मैंने भी हर छोटे छोटे एहसासो को खुशियों की तर...

वो डबल लाइन्स...!!

माँ बनने के बाद के सब पल यादगार ही होते है, हर माँ के लिए वो पल किसी अनमोल यादो से कम नहीं होते है | ऐसी ही कुछ यादो के पल मेरे भी है वो पहले पल जो आज भी अगर सोचने बैठ जाऊ तो मेरा मन खुश हो जाता है | शादी को तीन साल हो चुके थे पर अभी तक भगवान ने मुझे माँ बनने के ताज से सवारा नहीं था | मेरे साथ के ज्यादातर लोगो के बच्चे हो गए थे या होने वाले थे, मुझे अंदर से बहुत दुःख होता था एक अलग सा एहसास की मुझे यह ख़ुशी क्यों नहीं मिल रही | मैं अपने साथ के लोगो के बच्चो के साथ ही पूरा दिन बिताती थी बच्चो के साथ एक सुकून सा मिलता था मुझे , खुद का बच्चा नहीं होने की कमी नहीं लगती थी मुझे | पर कहते है न की भगवान के घर देर है पर अँधेर नहीं || हर महीने मैं उम्मीद रखती की इस  बार तो मुझे ही ख़ुशीखबर मिलेगी पर दिल टूट जाता | कितनी बार तो मैंने घर पर ही प्रेगनेंसी टेस्ट भी किये की क्या पता इसमें वो डबल लाइन दिख जाये पर इतने साल से कुछ नहीं हुआ| फिर भी हर महीने उम्मीद लगाए रखती थी क्या करे दिल मानता ही नहीं था | एक दिन मुझे अपनी तबियत थोड़ा ठीक नहीं लगी, फिर मैंने सोच...